क्या गूगल मैप्स सुरक्षित हैं?
23 नवंबर २०२४, यह वो दिन था जब कौशल, विवेक और अमित अपनी कार से गुरुग्राम से बरेली के लिए निकले| सड़क पर कोहरा भी ज़्यादा था| गूगल मैप्स को फॉलो करते हुए वे जा रहे थे सो की आमतौर पर हम सभी करते हैं| बरेली के पास जब वे रामगंगा नदी पुल से से गुज़र रहे थे तभी ड्राइवर ने देखा की आगे अचानक सड़क ख़तम है| ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया परन्तु तब तक देर हो चुकी थी और गाडी ५० फुट नीचे छत के बल जा गिरी|
रास्ता सुनसान था तो मदद के लिए कोई आया भी नहीं| जब राहगीरों ने कार देखि तब जाकर पुलिस को खबर हुई| तब तक विवेक और अमित अपनी जान गँवा बैठे थे|
कितनी दुखद घटना थी यह, मुझे तो उस परिवार के विषय में सोचकर पीड़ा होती है जिन्होंने अपने दो जवान बेटे खो दिए|
इसी के साथ मीडिया पर बहस छिड़ गयी कि इस घटना का दोषी कौन है? कुछ लोगों का कहना है की गूगल मैप्स दोषी है तो वहीँ कुछ लोगों ने स्थानीय प्रशासन को भी दोषी माना| कुछ एक यूजर ने मौसम, देर से मिलने वाली सहायता, ड्राइवर और पुल बनाने वाले ठेकेदार को भी दोषी बताया|
ज़िम्मेदार कोई भी हो, और किसी का दोष सिद्ध भी हो जाए तो भी उससे गयी जाने वापस नहीं आ सकती हैं|
मेरा नाम शांतनु है और मैं रोड रोड ट्रिप्स का शौकीन हूँ और भारत के अंदर मैं ५ लाख किमी गाडी चला चूका हूँ| मैं इस वीडियो में आपको तीन तरीके बताऊंगा जिससे ऐसी होने वाली घटनाओं से बचा जा सकता है|
ऑफलाइन नेविगेशन का प्रयोग करें
नेविगेशन सिस्टम दो तरह के आते हैं, ऑफलाइन और ऑनलाइन|
ऑफलाइन मैप्स आपके डिवाइस में पहले से डाउनलोड रहते हैं वहीँ ऑनलाइन मैप्स डाउनलोड रह भी सकते हैं या धीरे धीरे डाउनलोड होते रहते हैं| भारत में अधिकांश लोग गूगल मैप्स का प्रयोग करते हैं जो की ऑनलाइन कनेक्टेड मैप है|
ऑनलाइन मैप्स आपको कुछ अतिरिक्त सुविधाएँ प्रदान करते हैं, जैसे की ट्रैफिक की स्थिति, कहीं पहुँचने का शॉर्टेस्ट पथ जो की उन्होंने अन्य उपयोगकर्ताओं के आवागमन इ रास्तों से सीखा है| पर इनका एक नुक्सान यह होता है की सुझाया गया रास्ता आपकी गाडी के साइज के अनुरूप नहीं भी हो सकता है|
वहीँ ऑफलाइन मैप्स अधिकांशतः सरकारी डाटा का प्रयोग करते हैं, कहीं जाने के लिए वे उस मार्ग का प्रयोग करेंगे जो की सरकारी मान्य मार्ग है और अधिकांश ट्रैफिक इसी मार्ग से चलता है | वे अधिकांशतः नेशनल हाई वे या स्टेट हाई वे का प्रयोग करते हैं| हालाँकि इनका कुछ नुक्सान भी है क्योंकि यह गूगल मैप्स की अपेक्षा आपको लम्बा रास्ता दिखाएंगे, अक्सर इनमे डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा स्पेलिंग की त्रुटियां भी कर देते हैं तो आपको गंतव्य ढूंढने में दिक्कत हो सकती है |
अब इसका यह मतलब नहीं है की ऑफलाइन मैप का बताया रास्ता सही ही होगा पर सामन्यात िमार्ग में ट्रैफिक ज़्यादा होने के कारन इस बात की सम्भावना ज़्यादा है की आपको पहले ही पता चल जायेगा|
लोकल लोगों से रास्ता पूछिए
भले ही आप नेविगेशन का प्रयोग कर रहे हों अनजान रास्तों पर स्थानीय नागरिकों से रस्ते की पुष्टि अवश्य कर लें| अधिकांशतः लोकल लोग रस्ते की तात्कालिक परिश्थिति से अवगत रहते हैं| ज़रूरी नहीं की हर बार पल टूटा होगा पर कई बार सड़क बहुत ख़राब होती है या संकरी होती है, स्ताहनिया नागरिक आपको सही मार्गदर्शन दे सकते हैं|
सतर्क रहिये
देखिये दोस्तों, भारत वर्ष में गाड़ियां गूगल मैप्स के आने से पहले से चल रही हैं| और पहले भी ऐसी अनेक घटनाएं हुई हैं, जहाँ बस चलते हुए पल गिर गयी या गाड़ियां सामने वाली गाडी से टकरा गयी | किसी रूट पर रोज चलने वाले इतना कॉंफिडेंट हो जाते हैं की बस आँख बंद करके भी गाडी चला सकते हैं| बस यही ओवर कॉन्फीडेन्स एक दिन घातक सिद्ध होता है| २०१५ में महाराष्ट्र के महद में एक राज्य परिवहन की बस टूटे हुए पल से निचे जा गिरी और २० यात्रियों ने जान गँवा दी थी| ड्राइवर रोज उसी रूट पर चलता था पर उस रात महज आधे घंटे पहले ही वो पुल बाह गया था| आपको २०१८ का वह वीडियो भी याद होगा जिसमे यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के कारन एक के पीछे एक गाड़िया आ भिड़ी थी| इतने कोहरे के बावजूद लोग बहुत तेज चला रहे थे पर जब तक सामने वाली गाडी दिखती थी तब तक बहुत देर हो चुकी होती थी|
यहाँ पर ज़रूरत है वहां चालक के मुस्तैद रहने की |
गाडी चलाते समय सतर्क रहे, नज़र सड़क पर अगले १०० फुट तक रखें|
गाडी की गति उतनी ही रखें जितने में हमें भरोसा है की आपात्कालीन परिश्थिति में हम गाडी को रोक सकेंगे|
अंधे मोड़ पर बिलकुल भी ओवरटेक न करें| सामने से कभी भी कार आ सकती है|
हो सके तो एक पायलट कार को फॉलो करें| मैं अक्सर सड़कों पर एक पायलट कार चिन्हित कर लेता हूँ और उसे सेफ डिस्टेंस से फॉलो करता हूँ| इससे मुझे आने वाले अवांछित ब्रेकर इत्यादि की जानकारी मिलती रहती है|
सामने वाली की तेज लाइट हमारे देखने की क्षमता समापत कर देती है और हमें आगे का बिलकुल भी नहीं दिकता है| हो सकता है सामने बड़ा गड्ढा हो या कोई व्यक्ति पैदल जा रहा हो| रात के समय जब सामने से कोई गाडी हाई बीम में आ रही है तो उसे अपर डिपर या हाई लो बीम देकर लो बीम करने का इशारा करें| यही वह अपनी लाइट लो नहीं भी करे तो आप तो लो कर ही लें और नज़र नीचे रखकर गाडी की गति धीमे कर लें| उसकी हेडलाइट में बिलकुल न देखें, हम तो अंधे हो ही गए हैं पर काम से काम उसको भी अँधा न करें|
सीट बेल्ट अवश्य पहनें, यही सीट बेल्ट नहीं लगे हैं तो दुर्घटना की दशा में एयर बैग नहीं खुलेंगे|
नींद आने पर हमारे देखने और समझने की क्षमता अपने आप काम हो जाती है| चाय पीकर या मुँह में पानी के छींटे मारकर गाडी न चलाएं, इससे नीनद पूरी तरह से नहीं जाती है बल्कि फिर आ जाएगी|
नींद आने पर संकोच न करें और कोई सुरक्षित स्थान देखकर गाडी किनारे लगाकर २ घंटे की नींद ले लें| दोस्तों, जान है तो जहां है, बस इस बात को याद रखिये, सुरक्षित गाडी चलाएं, सुरक्षित घर पहुंचें|
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